शिवपुरी गुना लोकसभा क्षेत्र से सवा लाख वोटों से हार के बाद में अपना मान सम्मान घटता नजर आया और भाजपा का दामन थाम लिया l यहां तक कहा जा रहा है कि महाराज ने अपने वजूद का एहसास कराने एवं कर सरकार को करंट देने अपने भक्तों का अलर्ट कर दिया है l महल खेमे के कुछ मंत्रियों द्वारा अपनाए आक्रामक तेवरों से सरकार के समक्ष असहाय स्थिति निर्मित हो गई है l एक और खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल बनाकर चल रहे हैं और वही उनके समर्थक मंत्री अपना अलग अलग राग अपनाते हुए आंतरिक मतभेद उभर रहे हैं l बहुत जल्द 4 माह बाद मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव समर में उतरना है l ज्योतिरादित्य सिंधिया की भाजपा में पटरी नहीं बैठ पा रही है l
इतना ही नहीं ग्वालियर चंबल संभाग में भाजपा के साथ सम्मिलित नहीं हो सका l उन्होंने अपने विरोधी पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया से घर जाकर मिले ग्वालियर सांसद विवेक शेजवलकर के हाथ जोड़कर समझौता का प्रयास किया l भाजपा में बाजीगरी से ज्योतिराज सिंधिया भी अपने आप को उभार नहीं पा रहे हैं l राष्ट्रीय एवं प्रदेश कार्यकारिणी भी उनके मनमाफिक नहीं बनी है l अब अपने पुत्र और पत्नी को गुना शिवपुरी एवं ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से चुनावी रणनीति बना रहे हैं l वहीं भाजपा ने अंदर ही अंदर ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी और पुत्र को पिछोर विधानसभा क्षेत्र व लहार विधानसभा क्षेत्र से लड़ने की सलाह दे रहे है l भाजपा में महारथियों की चली तो उनकी पत्नी एवं पुत्र को पिछोर विधानसभा क्षेत्र से विधायक पूर्व मंत्री केपी सिंह और लहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह से सामना करना होगा l भाजपा के रणबांकुरे मध्य प्रदेश के सांसद, विधायक और दावेदार कतई नहीं चाहते कि ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके क्षेत्र में दखल दें l
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