वी/ओ-दरअसल शहर के माधौगंज लक्कड़खाना में रहने वाले 26 साल का शाहिद पेशे से कारपेंटर है। शाहिद के मामा सकील मंसूरी नगर निगम में महापौर की एमआईसी में सदस्य हैं। उनका भांजा शाहिद अपने साथी मोहसिन खान व बादशाह उर्फ शाहरूख खान के साथ फर्नीचर का काम पूरा करने के बाद रात 12 बजे सागरताल से अपने घर के लिए लौट रहा था। सड़क पर स्ट्रीट लाइट बंद थीं। जब वहां आनंद नगर रोड पहुँचा था कि अचानक सामने आया निर्माणधिन सीवर लाइन का गड्ढा अंधेरे के कारण नहीं दिखा और शाहिद की एक्टिवा उसमें जा गिरी। हादसे में शाहिद और मोहसिन सिर के बल गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। जबकि शाहरुख मामूली रूप से घायल हो गया। शाहरुख ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और परिजन को बताया। सूचना मिलते ही बहोड़ापुर थाना पुलिस पहुंची और घायल को बाहर निकालकर हॉस्पिटल पहुंचाया। लेकिन शाहिद की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। मोहसिन की हालत नाजुक है उसे हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। मृतक शाहिद की शादी डेढ़ साल पहले हुई थी और कुछ दिन पहले ही पुत्र का जन्म हुआ था। उसका एक तीन माह का बच्चा भी है। यहां गड्डा नगर निगम ने सीवर के लिए खुदवाया था। लेकिन न तो बाहर कोई संकेतक लगाया न ही हादसा रोकने के इंतजाम थे। साथ ही वहां लगी स्मार्ट सिटी की स्ट्रीट लाइट भी बंद थी। जिस कारण यह हादसा हुआ है। आए दिन शहर में लापरवाही से खोदे गए गड्ढे लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। जिस जगह हादसा हुआ था। उसके ठीक ऊपर ही स्ट्रीट लाइट लगी हुई थी। इसके बारे में पता चला है कि काफी समय से यह बंद पड़ी है और कई बार शिकायत करने पर इन्हें चालू नहीं कराया जा सका है। यहां पर हाईटेंशन लाइन काफी नीचे होने के चलते इससे भी जान का खतरा बना रहता है। जिसे लेकर स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेता में मिलकर इसका विरोध किया और दोषी अधिकारी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की वहीं घटना स्थल पर पहुंचे पुलिस नगर निगम प्रशासन के अधिकारियों ने विरोध कर रहे लोगों को कार्रवाई करने का आश्वासन दिया साथी कहा कि जो भी जांच पर दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
27 July 2024

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MP24X7...यानी समय, सत्ता और समाज के बनाए हुए नियम के खिलाफ जाने का मतलब है। सही मायनों में सुधारवाद का वह पथ या रास्ता है। जो अंतिम माना जाता है, लेकिन हम इसे शुरुआत के रूप में ले रहे हैं। सार्थक शुरुआत कितनी कारगर साबित होगी? यह तो भविष्य तय करेगा। फिर भी हम ब्रह्मपथ पर चल पड़े हैं, क्योंकि यह अंतिम पथ नहीं है। सुधारवाद की दिशा में एक छोटा कदम है।.
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